प्रकृति का अनुपम उपहार फूलों की घाटी धरती का स्वर्ग

प्रकृति का अनुपम उपहार फूलों की घाटी धरती का स्वर्ग

वैली ऑफ फ्लावर कुदरत का करिश्मा जो विश्वधरोहर स्थल बन चुका है

 

*500 से अधिक विभन्न फूलों की प्रजातियां

*बागवानी विशेषज्ञों या फूल प्रेमियी के लिए प्रसिद्द

*मध्य जुलाई, अगस्त ओर सितंबर माह में  सर्वोत्तम

*सितंबर माह में ब्रह्म कमल खिलते है जो भगवान शंकर को प्रिय है

 *बिर्टिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ ने 1931 में खोज की

*प्रसिद्द नंदा देवी अभ्यारण्य का एक भाग

यू तो समूचा उत्तराखंड का भू भाग किसी ना किसी रूप में  अपनी विशिष्ट पहचान विश्व के सामने रखता है।इस समूचे हिमालय प्रदेश में कण कण में भगवान का वाश है।अध्य्यात्मिक आदर्श के साथ यहाँ ट्रेकिंग,पर्वतारोहियों, ओर साहसिक खेलो सहित अन्य तमाम वो विधाएं उपलब्ध है जो देशी, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती है इसी कड़ी में चमोली जनपद में स्थित फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक फूलों की घाटी का नाम है जिसे अंग्रेजी में वैली ऑफ फ्लावर कहते है। ये स्थल विश्व धरोहर के रूप में नंदा देवी अभ्यारण्य का एक भाग है।

फूलों की घाटी  बद्रीनाथ धाम से  लगभग 30 किलो मीटर पहले द्रोणागिरी पर्वत पर बसी है।अपने हिन्दू धर्मालंबियों की अटूट आस्था का धार्मिक ग्रंथ रामायण में उल्लेख मिलता है कि जब सीता हरण के बाद भगवान राम को पता चलते है कि सीता जी का हरण लंकापति रावण ने किया है तो फिर वो अपने भाई लक्ष्मण और हनुमान सहित अपने अन्य समर्थकों के साथ लंका चढ़ाई करते है।लाख कोशिश करने के  बाद भी जब रावण अपने हठ से बाज नही आता तो फिर युध्द की घोषणा हो जाती है।रावण सेना और परिवार का अंत देखते हुए मेघनाथ को युध्द की कमान सौंप देता है दूसरी ओर अपने भाई का लगातार साथ देने वाले शेषनाथ अवतार लक्ष्मण स्वयं मेघनाथ से लड़ाई करते हैऔर मेघनाथ के छ्ल कपट से ब्रह्मास्त्र  का प्रयोग करने लक्ष्मण को गंभीर मूर्च्छा आ जाती है।भगवान राम हनुमान को औषधि के लिये गन्दमादन पर्वत भेजा जहाँ हनुमान जी ने आकर पूरा गन्दमादन पर्वत हाथ मे उठाकर लंका ले गए क्योंकि संजीवनी बूटी की पहचान उन्हें नही हो पसई तो फिर समय की गति जे आधार पर पूरा पर्वत उखाड़कर वो लंका ली गई और लक्ष्मण के प्राण बचने में कारगर साबित हुये आज भी इस घाटी  में हनुमान जी की पूजा नही की जाती है  इसी  पर्वत के पास फूलों की घाटी स्थित है ।प्रकृति द्वारा ये उपहार स्वरूप तोहफा विश्व को प्रदान किया है।इस घाटी में 500 से अधिक फूलों की जातियां फूलों से सम्बंधित विशेषज्ञों, रिसर्च करने वाले और अन्य पर्यटकों को स्वयं आकर्षित करने में विशिष्ट स्थान रखता है।

बिर्टिश पर्वतारोही फेंक एस स्मिथ  और उनके साथी होल्डसवर्थ ने 1931 में कॉमेंट पर्वत अभियान से लौटने पर इस बेइंतहा खूबसूरती से प्रभावित होकर यहाँ कुछ दिन बिताये ।यहाँ से प्रभावित होने पर 1937 में फिर वापस आये और 1938 में वैली ऑफ फ्लावर नाम की एक किताब प्रकाशित करवा कर विश्व मानचित्र में इसकी पहचान करवाने में सफल रहे आज भी ये फूल प्रेमियों के ज्ञानार्जन का सबसे सुंदर स्थल है ।पर्यावरण, सौंदर्य और चारो ओर से बर्फ से ढकी श्रेणियो के बीच अपने आप मे धरती का स्वर्ग है।अनेक प्रकार की जड़ी बूटियों सहित दुर्लभ जाति के फूल जो क़ुदरत ने निःशुल्क उपहार में दिए है ।आज मानव जाति के निरन्तर हस्तक्षेप के बाद इनमे भी खतरा मंडराने लगा है।प्रकृति के इस उपहार को बचाने की मुहिम भी जरूरी है अन्यथा प्रयोग के दौर में फूलों की जातियां काफी प्रभावित हो सकती है। फूलों की घाटी में प्लास्टिक बैग सहित पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वाले कोई भी पदार्थ वहाँ ले जाने के लिये वर्जित किया जाना जरूरी है तभी हम फूलों की घाटी की सरंक्षित कर पायेंगे। इस दिशा में काम भी हो रहा है।   इस फूलों की घाटी में अनेक रहस्य छुपे है जिनमे जॉन मारग्रेट लैगी 1939 में रिसर्च हेतु आई और फूलों के बारे में अध्ययन सहित फूलों को जमा करने के दौरान कुछ दिन घाटी में रही।एक दिन कारणवश पैर स्लिप हो जाने की दशा में अपनी जान गंवा बैठी ।1944 में जॉन मारग्रेट लैगी की बहिन घाटी में आई और अपनी बहिन की याद में उन्होंने एक मेमोरियल बनाकर उनकी याद ताजा करवाई।आज भी ये मेमोरियल पर्यटकों हेतु  स्थित है। फूलों की लगातार खुशबू के कारण कई पर्यटक कुछ देर घूमने पर ही बेहोश हो जाते है और फिर पूरी घाटी का आनन्द नही ले पाते।इसलिये घाटी जाने से पूर्व कुछ बातों का ध्यान पर्यटकों को रखना जरूरी है अन्यथा इसके अभाव में जोखिम भी सहन पड़ सकता है।इस घाटी को घूमने का सबसे उपयुक्त समय मध्य जुलाई से मध्य सितंबर तक का है। यहाँ फूलों की जो प्रजातियां  पायी जाती है उनमें एनीमोन,जर्मेनियम,मार्थ, गेंदा, प्रिभुला, पोटेंटीला,जिउम,तारक, लिलियम,हिमालयी नीला पोस्ट,बछनाग,डेलमिनियम , क़ानूनकुलम , कोरिडालिस,इन्द्रला,सोसुरिया, कम्पानुला, पेडिक्युलरिया,मोरिना, एम्पेटिन्स,विस्टोरता, लीगुलारिया,अनाफलिस,सेक्सी फांगा, लोबिलिम,थर्मोपरिस,ट्रॉलियम, एक्यूलेगिया,कोडोनोपॉसिस,डेक्टरा ऐलोरहिज्म, साइ परिएपेडियम,स्ट्राबेरी ओर रोडोडियो ड्रॉन इत्यादि प्रमुख प्रजातिंया प्रमुख है।

Bharat Bhushan Kukreti

LEAVE YOUR COMMENT

Your email address will not be published. Required fields are marked *